अबू धाबी, 7 नवंबर 2026 (WAM) – बुर्जील होल्डिंग्स की प्रमुख संस्था बुर्जील मेडिकल सिटी (BMC) ने अबू धाबी स्वास्थ्य विभाग (DoH) के सहयोग और निगरानी में, नाक के पॉलिप्स के साथ क्रोनिक राइनोसाइनसाइटिस (CRSwNP) के लिए अति-दीर्घकालिक जैविक उपचार Exdensur (डेपेमोकिमैब) खाड़ी क्षेत्र में पहली बार दिया है।

यह उपचार उन मरीज़ों के लिए एक नया विकल्प है जिनके लक्षण पारंपरिक चिकित्सा उपचार और सर्जरी के बावजूद बार-बार लौट आते हैं। त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में दिया जाने वाला डेपेमोकिमैब छह महीने के खुराक अंतराल में साइनस की अंतर्निहित सूजन पर निरंतर नियंत्रण प्रदान करने के लिए बनाया गया है।

यह इंजेक्शन 43 वर्षीय एक अमीराती पुरुष मरीज़ को दिया गया, जो पांच वर्ष से अधिक समय से इस बीमारी से पीड़ित थे और नाक बंद होना, सूंघने की क्षमता खोना और बार-बार साइनस संक्रमण जैसे लक्षणों का सामना कर रहे थे। मरीज़ की पहले दो बार साइनस सर्जरी हो चुकी थी, लेकिन राहत अस्थायी रही और लक्षण अंततः लौट आए।

यह उपचार बुर्जील ईएनटी हेड एंड नेक इंस्टीट्यूट के कंसल्टेंट और सह-निदेशक डॉ. योगेश मोरे के नेतृत्व वाली ईएनटी टीम ने दिया।

डॉ. मोरे ने कहा, “अधिकांश लोगों को जीवन में कभी न कभी नाक और साइनस की समस्याएं होती हैं। लेकिन जब लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं और पॉलिप्स से जुड़े होते हैं, तो वे जीवन की गुणवत्ता को काफी प्रभावित कर सकते हैं। इस मामले में लक्षणों ने उनकी सूंघने की क्षमता को प्रभावित किया, जिससे वे भोजन की सुगंध और इत्र का आनंद नहीं ले पा रहे थे। बार-बार नाक बंद होने से नींद बाधित और अपर्याप्त रहती थी, जिससे दिन में सुस्ती और थकान होती थी। कुल मिलाकर इससे उनकी ऊर्जा प्रभावित हुई और जीवन की गुणवत्ता खराब हुई। यूएई में मौसम बदलने के दौरान और यात्रा के बाद साइनस एलर्जी बढ़ जाती थी।”

उपचार के बाद मरीज़ के नाक और साइनस के लक्षणों में सुधार हुआ और उनकी सूंघने की क्षमता लौट आई।

डॉ. मोरे ने आगे कहा, “हमने जो सबसे महत्वपूर्ण लाभ देखा है, उनमें से एक मरीज़ की सूंघने की क्षमता का लौटना है। साइनस सर्जरी और स्टेरॉयड सहित मौजूदा उपचार विकल्प इस क्षेत्र में हमेशा पर्याप्त सुधार नहीं देते। साइनस सर्जरी के साथ उपयोग करने पर यह उपचार नाक के पॉलिप्स की पुनरावृत्ति को कम करने में भी मदद कर सकता है।”

डेपेमोकिमैब एक दीर्घकालिक जैविक उपचार है जो बीमारी के पीछे की सूजन के प्रमुख कारकों में से एक को लक्षित करता है। यह साइनसाइटिस और नाक के पॉलिप्स से पीड़ित उन पात्र वयस्क मरीज़ों को दिया जा सकता है जिनमें टाइप 2 सूजन अधिक है, जिन पर पर्याप्त चिकित्सा और शल्य उपचार विफल रहा है और जिनके दैनिक जीवन पर बीमारी का गंभीर असर है। एक खुराक इस सूजन को छह महीने तक नियंत्रित रखने के लिए बनाई गई है, जो बार-बार होने वाले लक्षणों में योगदान देने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाओं की सक्रियता कम करने में मदद करती है।

डॉ. मोरे ने कहा, “क्रोनिक साइनसाइटिस का उपचार आमतौर पर एंटीहिस्टामाइन और नेज़ल स्प्रे जैसी दवाओं से किया जाता है, जबकि सर्जरी गंभीर मामलों के लिए रखी जाती है। कुछ मरीज़ों में इन उपायों के बावजूद बीमारी बार-बार लौटती है। उनके लिए जैविक उपचार एक आकर्षक विकल्प प्रदान करते हैं।”

डॉक्टर ने समझाया, “खुराकों के बीच का अंतराल बढ़ाकर हर छह महीने में एक बार करना पात्र मरीज़ों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, जिससे वे बीमारी पर नियंत्रण और बेहतर जीवन गुणवत्ता के साथ अपनी उपचार आवश्यकताओं और व्यक्तिगत व पेशेवर प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बना सकें।”

उन्होंने ज़ोर दिया कि उचित नैदानिक मानदंडों के अनुसार चुने गए मरीज़ों में जैविक उपचार बीमारी की पुनरावृत्ति के जोखिम और अतिरिक्त सर्जरी की आवश्यकता को भी कम कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लगातार या बार-बार लक्षणों का अनुभव करने वाले मरीज़ों को गहन चिकित्सा मूल्यांकन और सटीक निदान के लिए विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए, ताकि प्रत्येक मरीज़ की स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त उपचार योजना तय की जा सके।

यह उपलब्धि जटिल और लंबे समय से चली आ रही ईएनटी समस्याओं से पीड़ित मरीज़ों तक उन्नत, साक्ष्य-आधारित उपचार पहुंचाने पर बुर्जील मेडिकल सिटी के फोकस को और मज़बूत करती है।

(स्रोत: WAM.ae)