अल ऐन, 1 नवंबर 2026 (WAM) -- अल ऐन चिड़ियाघर ने अनुप्रयुक्त अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से एक विशेषीकृत वैज्ञानिक संस्थान के रूप में अपनी स्थिति मज़बूत की है। ये प्रयास क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर वन्यजीवों की रक्षा, जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता को आगे बढ़ाने की यूएई की कोशिशों का समर्थन करते हैं।

दिवंगत शेख ज़ायद बिन सुल्तान अल नहयान द्वारा 1968 में स्थापित इस चिड़ियाघर में 4,000 से अधिक जानवर हैं और यह अरब प्रायद्वीप तथा पूर्वोत्तर अफ्रीका के रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी परिवेश की देशज प्रजातियों पर केंद्रित अनुसंधान करता है।

इसकी प्रमुख पहलों में एक आनुवंशिक अध्ययन कार्यक्रम शामिल है, जो जानवरों की पहचान और वर्गीकरण करने, आनुवंशिक विविधता बनाए रखने तथा प्रजाति संरक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने वाले अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ जानवरों के आदान-प्रदान को दिशा देने के लिए डीएनए विश्लेषण का उपयोग करता है।

चिड़ियाघर लुप्तप्राय प्रजातियों, अपनी सुविधाओं के भीतर जैव विविधता तथा जानवरों के जीव विज्ञान और व्यवहार पर भी अनुसंधान करता है, ताकि देशज प्रजातियों का दस्तावेज़ीकरण किया जा सके, यूएई के पर्यावरण के प्रति वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाई जा सके और प्रजनन कार्यक्रमों तथा सतत वन्यजीव प्रबंधन में सुधार किया जा सके।

अल ऐन चिड़ियाघर ने अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग से डामा गज़ेल संरक्षण रणनीति 2019-2028 के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह इस गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति के दुनिया के सबसे बड़े प्रजनन केंद्रों में से एक बन गया है और इसे इसके प्राकृतिक आवास में पुनः बसाने के प्रयासों का समर्थन कर रहा है।

चिड़ियाघर ने अरबी ओरिक्स के संरक्षण में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। यहां 300 से अधिक अरबी ओरिक्स हैं और आनुवंशिक प्रबंधन तथा प्रजनन कार्यक्रमों को बेहतर बनाने के लिए इसने अपने झुंडों का व्यापक आनुवंशिक विश्लेषण किया है, साथ ही यूएई और विदेशों में पुनर्वास परियोजनाओं का समर्थन भी किया है।

इसकी अरबी रेत बिल्लियों की आबादी संरक्षण प्रजनन, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्राकृतिक आवासों के बाहर आबादी के प्रबंधन में योगदान देती है।

अनुसंधान गतिविधियों में प्रवासी पक्षी और दुर्लभ तितलियां भी शामिल हैं। इसके साथ ही पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और जैव विविधता के संरक्षण में सहायता के लिए दर्जनों देशज पौधों की प्रजातियों वाला एक बीज बैंक भी है।

चिड़ियाघर ज़ूलॉजिकल इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (ZIMS) सहित उन्नत तकनीकों का उपयोग करता है, जो शोधकर्ताओं और पशु चिकित्सकों के साक्ष्य-आधारित निर्णयों में सहायता के लिए स्वास्थ्य, आनुवंशिक और व्यवहार संबंधी एकीकृत आंकड़े उपलब्ध कराता है। आधुनिक पशु चिकित्सा देखभाल और व्यवहार पुनर्वास तकनीकें भी जानवरों के प्रबंधन में सहायक हैं।

इसकी वैज्ञानिक साझेदारियों में रॉयल ज़ूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ स्कॉटलैंड (RZSS) के साथ सहयोग शामिल है, विशेष रूप से अरबी रेत बिल्लियों और अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों से जुड़े आनुवंशिक अनुसंधान में।

अपने अनुसंधान कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से अल ऐन चिड़ियाघर ने स्वयं को वन्यजीव अनुसंधान के एक अग्रणी क्षेत्रीय संस्थान के रूप में स्थापित किया है, जो वैज्ञानिक ज्ञान तथा लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए जैव विविधता के संरक्षण के वैश्विक प्रयासों में योगदान दे रहा है।

(स्रोत: WAM.ae)