दुबई, 2 नवंबर 2026 (WAM) -- दुबई का ग़ाफ़ नज़वा संरक्षण अभयारण्य ग़ाफ़ वृक्षों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने, यूएई की पर्यावरणीय विरासत को संरक्षित रखने तथा जैव विविधता संरक्षण और रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्रों की स्थिरता को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मरग़म के उत्तर में स्थित 0.13 वर्ग किलोमीटर का यह अभयारण्य दुबई का सबसे छोटा संरक्षित क्षेत्र है। यहाँ पक्षियों की 19, स्तनधारियों की पाँच, सरीसृपों की छह, अकशेरुकी जीवों की 24 और पौधों की 12 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

2014 के डिक्री संख्या 22 के तहत स्थापित यह अभयारण्य ग़ाफ़ वृक्षों की रक्षा करता है, जो कठोर रेगिस्तानी परिस्थितियों के अनुकूल हैं और विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों को आवास प्रदान करते हैं। यूएई ने ग़ाफ़ के पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्व को मान्यता देते हुए 2008 में इसे अपना राष्ट्रीय वृक्ष घोषित किया था।

अभयारण्य में दर्ज वन्यजीवों में माउंटेन गज़ेल तथा विभिन्न रेगिस्तानी पक्षी और सरीसृप शामिल हैं। यहाँ के ग़ाफ़ वृक्ष और आसपास के आवास फ़ैरो ईगल-आउल और अन्य रेगिस्तानी पक्षियों को भी आश्रय देते हैं।

दुबई पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण (DECCA) के महानिदेशक अहमद मोहम्मद बिन थानी ने कहा कि यह अभयारण्य ग़ाफ़ आवासों की रक्षा और यूएई की पर्यावरणीय विरासत के संरक्षण के प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने अभयारण्य के सतत प्रबंधन और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति प्राधिकरण की प्रतिबद्धता दोहराई।

DECCA सतत भूमि प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से ग़ाफ़ की आबादी और उससे जुड़े आवासों की रक्षा के लिए काम करता है, जो स्थानीय वनस्पति के पुनर्जनन को बढ़ावा देती हैं और पारिस्थितिक स्थिरता बनाए रखती हैं। उसके प्रयासों में वैज्ञानिक अध्ययन और शोध पहलें भी शामिल हैं, जो मरुस्थलीकरण को कम करने और मिट्टी के गुणों तथा उर्वरता में सुधार लाने में ग़ाफ़ वृक्षों की भूमिका की जाँच करती हैं। इससे रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्रों के अधिक प्रभावी प्रबंधन और संरक्षण में योगदान मिलता है।

ये पहलें राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति 2031 और यूएई ग्रीन एजेंडा 2030 के लक्ष्यों का समर्थन करती हैं, जिनका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्रों, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है।

(स्रोत: WAM.ae)