शारजाह परामर्शदात्री परिषद (SCC) ने कई संशोधनों के बाद शारजाह अमीरात में खोई हुई और परित्यक्त संपत्ति के निपटान से संबंधित मसौदा कानून को मंज़ूरी दे दी। यह मंज़ूरी परिषद की ग्यारहवीं विधायी अवधि के चौथे सामान्य सत्र की दूसरी बैठक में, मसौदा कानून और परिषद की जन उपयोगिता मामलों की समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर चर्चा के बाद दी गई। बैठक शारजाह शहर में परिषद के मुख्यालय में आयोजित हुई।

बैठक की अध्यक्षता शारजाह परामर्शदात्री परिषद (SCC) की अध्यक्ष हलीमा हुमैद अल ओवैस ने की। बैठक में शारजाह कार्यकारी परिषद के सदस्य और शारजाह पुलिस के कमांडर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अब्दुल्ला मुबारक बिन आमेर तथा शारजाह सरकार के विधि विभाग की निदेशक काउंसलर आयशा मोहम्मद हज़ीम अल सुवैदी भी उपस्थित थीं, जिनके साथ विभाग और शारजाह पुलिस मुख्यालय के प्रतिनिधि भी थे। चर्चा की शुरुआत में SCC की महासचिव मीरा खलीफ़ा अल मुकर्रब ने बताया कि SCC को 17 सितंबर को कार्यकारी परिषद के महासचिवालय से एक पत्र मिला था, जिसमें शारजाह में खोई हुई और परित्यक्त संपत्ति के निपटान से संबंधित मसौदा कानून भेजा गया था।

अपने आंतरिक विनियमों के अनुच्छेद 71 के अनुसार, परिषद ने 15 अक्टूबर 2026 को हुई अपनी पहली पूर्ण बैठक में मसौदा कानून को जाँच और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जन उपयोगिता मामलों की समिति को भेजने पर सहमति जताई थी। उन्होंने इस उद्देश्य से बैठक आयोजित करने के लिए समिति का आभार व्यक्त किया।

लेफ्टिनेंट जनरल अब्दुल्ला मुबारक बिन आमेर ने अमीरात के लिए एक महत्वपूर्ण मसौदा कानून पर परिषद की चर्चा में शारजाह पुलिस और शारजाह विधि विभाग की भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने खोई हुई और परित्यक्त संपत्ति को विनियमित करने, शारजाह के विधायी विकास को समर्थन देने और सर्वोच्च परिषद के सदस्य एवं शारजाह के शासक महामहिम शेख़ डॉ. सुल्तान बिन मोहम्मद अल क़ासिमी के विज़न और निर्देशों के अनुरूप उसके कानूनी ढाँचे को आगे बढ़ाने में इसके प्रावधानों के महत्व पर ज़ोर दिया, ताकि जनहित की पूर्ति हो और समुदाय के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा हो।

उन्होंने मसौदा कानून के पीछे की समग्र दृष्टि का ब्योरा दिया और बताया कि किन कारणों से सरकार ने इसे तैयार किया तथा इसका विधायी और कानूनी महत्व क्या है। लेफ्टिनेंट जनरल बिन आमेर ने कहा कि मसौदा कानून उस कार्य को विनियमित करता है जिसे शारजाह पुलिस मुख्यालय संबंधित प्राधिकरणों और उनके कर्मियों के सहयोग से पहले से कर रहा है।

यह निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से खोई हुई और परित्यक्त संपत्ति की सुरक्षा, प्रबंधन और निपटान के लिए स्पष्ट एवं व्यापक कानूनी तंत्र स्थापित करता है। इससे शारजाह पुलिस के संबंधित विभाग के माध्यम से मिली संपत्ति का निपटारा आसान होगा, यूएई के भीतर और बाहर मालिकों के साथ संवाद मज़बूत होगा और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।

मसौदा कानून वित्तीय आय को शारजाह सरकार के सार्वजनिक राजकोष खाते में जमा करने को भी विनियमित करता है, जिससे पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा मिलता है और कानून के अनुसार वित्तीय प्रक्रियाओं में एकरूपता आती है। काउंसलर आयशा मोहम्मद हज़ीम अल सुवैदी ने मसौदा कानूनों पर चर्चा करने और उन्हें विकसित करने में परिषद की विधायी भूमिका की सराहना की, जो अमीरात के विधायी ढाँचे को पूरा करने और विकास की ज़रूरतों के साथ तालमेल बनाए रखने में मदद करती है।

उन्होंने कहा, “हमें शारजाह में खोई हुई और परित्यक्त संपत्ति के निपटान से संबंधित मसौदा कानून पर चर्चा में सरकारी प्रतिनिधियों के साथ शामिल होकर प्रसन्नता है। खोई हुई और परित्यक्त निधियों एवं संपत्ति से निपटने की प्रक्रियाओं को विनियमित करने और ज़िम्मेदारियों को इस तरह तय करने के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि मालिकों के अधिकारों की रक्षा हो, संपत्ति सुरक्षित रहे और जनहित को बढ़ावा मिले।” उन्होंने पुष्टि की कि परिषद सदस्यों की चर्चाएँ, टिप्पणियाँ और संशोधन कानून को बेहतर बनाने, उसकी प्रभावशीलता बढ़ाने और उसके प्रावधानों की स्पष्टता सुनिश्चित करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

इसके बाद परिषद ने अपने आंतरिक विनियमों के अनुच्छेद 74 के तहत सैद्धांतिक रूप से मसौदा कानून पर चर्चा करने पर सहमति जताई। हलीमा हुमैद अल ओवैस ने बताया कि मसौदा कानूनों पर विचार करने की स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार परिषद पाठ को अनुच्छेद-दर-अनुच्छेद परखेगी, टिप्पणियों पर विचार करेगी और हर प्रावधान को अनुमोदित करेगी, चाहे समिति के संशोधनों को स्वीकार करके या कार्यकारी परिषद से प्राप्त शब्दावली को बनाए रखकर।

इसके बाद जन उपयोगिता मामलों की समिति के रैपोर्टर और परिषद सदस्य अहमद उबैद अल अवासिया ने मसौदा कानून पढ़कर उसकी परिभाषाएँ, उद्देश्य, उत्तरदायित्व के क्षेत्र और अन्य कानूनी प्रावधान प्रस्तुत किए। परिषद सदस्यों ने मसौदे के समग्र ढाँचे और खोई हुई तथा परित्यक्त संपत्ति के कानूनी पहलुओं पर केंद्रित चर्चा की, जिसमें प्रत्येक श्रेणी की प्रकृति और उसके कानूनी निहितार्थों के बीच अंतर करने का महत्व भी शामिल था।

उन्होंने शारजाह में खोई हुई और परित्यक्त संपत्ति के निपटान से जुड़े कानून के सभी प्रावधानों और उद्देश्यों की जाँच की, जिनमें संपत्ति की सुरक्षा, अधिकारों की रक्षा और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के विनियमन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इनका उद्देश्य जनहित और मालिकों के वैध अधिकारों का सम्मान करते हुए ऐसी संपत्ति पर लागू नियमों को स्पष्ट करना है।

सदस्यों ने मिली हुई या परित्यक्त संपत्ति से निपटने के कानूनी और प्रक्रियात्मक ढाँचों को नियंत्रित करने वाले अनुच्छेदों पर भी विचार किया। उन्होंने उसके हस्तांतरण, सुरक्षित अभिरक्षा, प्रबंधन और निपटान से जुड़ी ज़िम्मेदारियों और अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने के महत्व पर ज़ोर दिया, साथ ही उसे सुरक्षित रखने और मालिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने की बात कही।

(स्रोत: WAM.ae)